menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

बुधवार, 11 जून 2014

chhand salila;

छंद सलिला:
विष्णुपदRoseछंद 

संजीव
*
छंद लक्षण:  जाति महाभागवत, प्रति पद २६ मात्रा, 
                   यति१६-१०, पदांत गुरु 

लक्षण छंद:

    सोलह गुण आगार विष्णुपद , दस दिश बसें रमा
    अवढरदानी प्रभु प्रसन्न हों , दें आशीष उमा 
    गुरु पदांत शोभित हो गुरुवत , सुमधुर बंद रचें 
    भाव बिम्ब लय अलंकार रस , सस्वर छंद नचें       
    
उदाहरण:

१. भारत माता की जय बोलो , ध्वज रखो ऊँचा
   कोई काम न ऐसा करना , शीश झुके नीचा    
   जगवाणी हिंदी की जय हो , सुरवाणी बोलो        
   हर भाषा है शारद मैया , कह मिसरी घोलो 

२. सारी दुनिया है कुटुंबवत , दूर करो दूरी            
    भाषा-भूषा धर्म-क्षेत्र की , क्यों हो मजबूरी?
    दिल का दिल से नेता जोड़ो , भाईचारा हो 
    सांझी थाती रहे विरासत , क्यों बँटवारा हो?     

३. जो हिंसा फैलाते उनको , भारी दंड मिलें        
    नारी-गौरव के अपराधी , जीवित नहीं बचें 
    ममता समता सदाचार के , पग-पग कमल खिलें   
    रिश्वत लालच मोह लोभ अब, किंचित नहीं पचें 
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अनुगीत, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामरूप, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, विष्णुपद, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

मंगलवार, 10 जून 2014

chhand salila: anugeet chhand -sanjiv

छंद सलिला:
अनुगीतRoseछंद 

संजीव
*
छंद लक्षण:  जाति महाभागवत, प्रति पद २६ मात्रा, 
                   यति१६-१०, पदांत लघु 

लक्षण छंद:

    अनुगीत सोलह-दस कलाएँ , अंत लघु स्वीकार
    बिम्ब रस लय भाव गति-यतिमय , नित रचें साभार     
    
उदाहरण:

१. आओ! मैं-तुम नीर-क्षीरवत , एक बनें मिलकर
   देश-राह से शूल हटाकर , फूल रखें चुनकर     
   आतंकी दुश्मन भारत के , जा न सकें बचकर      
   गढ़ पायें समरस समाज हम , रीति नयी रचकर    

२. धर्म-अधर्म जान लें पहलें , कर्तव्य करें तब            
    वर्तमान को हँस स्वीकारें , ध्यान धरें कल कल
    किलकिल की धारा मोड़ें हम , धार बहे कलकल 
    कलरव गूँजे दसों दिशा में , हरा रहे जंगल    

३. यातायात देखकर चलिए , हो न कहीं टक्कर          
    जान बचायें औरों की , खुद आप रहें बचकर  
    दुर्घटना त्रासद होती है , सहें धीर धरकर  
    पीर-दर्द-दुःख मुक्त रहें सब , जीवन हो सुखकर
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अनुगीत, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामरूप, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

सोमवार, 9 जून 2014

chhand salila: kamroop chhand -sanjiv

छंद सलिला:
कामरूपRoseछंद 

संजीव
*
छंद लक्षण: जाति महाभागवत, प्रति पद मात्रा २६, यति ९-७-१०, पदांत गुरु लघु 

लक्षण छंद:

    कामरूप छंद , दे आनंद , सँग खुशियां अनंत
    मुँहदेखा नहीं , सच हमेशा , खरा कहे ज्यों संत   
    नौ निधि सात सुर , दस दिशाएँ , करें सुकीर्ति गान 
    अंत में अंतर , भुला लघु-गुरु , लगे सदा समान    
      
उदाहरण:

१. गले लग जाओ , प्रिये! आओ , करो पूरी चाह
   गीत मिल गाओ , प्रिये! आओ , मिटे सारी दाह  
   दूरियाँ कम कर , मुस्कुराओ , छिप भरो मत आह    
   मन मिले मन से , खिलखिलाओ , करें मिलकर वाह  

२. चलें विद्यालय , पढ़ें-लिख-सुन , गुनें रहकर साथ          
    करें जुटकर श्रम , रखें ऊँचा , हमेशा निज माथ
    रोप पौधे कुछ , सींच हर दिन , दें धरा को हास
    प्रदूषण हो कम , हँसे जीवन / कर सदैव प्रयास 

३. ईमान की हो , फिर प्रतिष्ठा , प्रयासों की जीत
    दुश्मनों की हो , पराजय ही / विजय पायें मीत
    आतंक हो अब , खत्म नारी , पा सके सम्मान
    मुनाफाखोरी ,  न रिश्वत हो , जी सके इंसान

४. है क्षितिज के उस ओर भी , सम्भावना-विस्तार
    है ह्रदय के इस ओर भी , मृदु प्यार लिये बहार
    है मलयजी मलय में भी , बारूद की दुर्गंध
    है प्रलय की पदचाप सी , उठ रोक- बाँट सुगंध   
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामरूप, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

chhand salila: jhulna chhand -sanjiv

छंद सलिला:
झूलनाRoseछंद 

संजीव
*
छंद लक्षण:  जाति महाभागवत, प्रति पद २६ मात्रा, 
                   यति ७-७-७-५, पदांत गुरु लघु 

लक्षण छंद:

    हरि! झूलना , मत भूलना , राधा कहें , हँस झूम
    घन श्याम को , झट दामिनी , ने लिया कर , भर चूम    
    वेणु सुर ऋषि , वचन सुनने , लास-रास क/रें मौन 
    कौन किसका , कब हुआ है? , बोल सकता / रे! कौन?   
      
उदाहरण:

१. मैं-तुम मिले , खो, गुम हुए , फिर हम बने , इकजान
   पद-पथ मिले , मंज़िल हुए , हमदम हुए , अनजान   
   गेसू खुले , टेसू खिले , सपने हुए , साकार     
   पलकें खुलीं , अँखियाँ मिलीं , अपने हुए , दिलदार   

२. पथ पर चलें , गिर-उठ बढ़ें , नभ को छुएँ , मिल साथ           
    प्रभु! प्रार्थना , आशीष दें , ऊँचा उठा , हो माथ
    खुद से न आँ/खें चुराने , की घड़ी आ/ये तात!
    हौसलों की , फैसलों से , मत हो सके , रे मात   

३. देश-गौरव , से नहीं है , अधिक गौरव , सच मान        
    देश हित मर-मर अमर हों , नित्य शहीद, हठ ठान 
    है भला या , है बुरा- है , देश अपना , मजबूत 
    संभावना , सच करेंगे , संकल्प है , शुभ-पूत
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामरूप, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

शनिवार, 7 जून 2014

rashtreey kayasth mahaparishad sammelan cuttack 6-7-2014

ॐ 
राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद 
(मानव कल्याण हेतु समर्पित संस्थाओं/सज्जनों का परिसंघ, पंजीयन क्रमांक: ०८७४/२०१३)
अध्यक्ष: त्रिलोकीप्रसाद वर्मा रामसखी निवास, पड़ाव पोखरलेन, आमगोला, मुजफ्फरपुर-८४२००१ बिहार ०९४३१२३८६२३, ०६२१-२२४३९९९, trilokee.verma@gmail.com 
महामंत्री : इंजी. संजीव वर्मा'सलिल', २०४ , विजय अपार्टमेन्ट, नेपियर टाउन, जबलपुर, ४८२००१ मध्य प्रदेश ९४२५१ ८३२४४ , ०७६१ २४१११३१, salil.sanjiv@gmail.com  
कोषाध्यक्ष सह प्रशासनिक सचिव: अरबिंद कुमार सिन्हा जे. ऍफ़. १/७१, ब्लोक ६, मार्ग १० राजेन्द्र नगर पटना ८०००१६ ०९४३१० ७७५५५, ०६१२ २६८४४४४, arbindsinha@yahoo.com 
।  कायास्थित ईश का, अंश हुआ कायस्थ ।
।। सब सबके सहयोग से, हों उन्नत आत्मस्थ ।।
================
पत्र क्रमांक: ४८५ महा/राकाम/२०१४                   जबलपुर, दिनाँक:​ ७-६-२०१४ 
            राष्ट्रीय कायस्थ महासभा अर्धवार्षिक सम्मेलन : २०१३-१४ : अधिसूचना
. दिनांक: ५-६ जुलाई २०१४,   स्थान:श्री रामचन्द्र भवन, म्युनिसिपैल्टी कॉम्प्लेक्स,कटक।
संयोजक:प्रो. डॉ. नीलमणि दास, उपाध्यक्ष रा.का.म., चलभाष:०९४३७३१३६६७, ई मेल: Nilamani Das
कार्यक्रम विवरण : दिनांक : ५ - ७- २०१४
(अ)  कार्यकारिणी/संगठन समिति समिति बैठक  : अपरान्ह ४.०० बजे से संध्या ६.०० बजे । 
[संविधान कंडिका १२  के अनुसार उपस्थिति प्रार्थनीय : अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री, सचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष, संगठन सचिव, संयुक्त संगठन सचिव, मुख्य समन्वयक, संयोजक, प्रकोष्ठ प्रभारी आदि समस्त पदाधिकारी तथा सम्बद्ध संस्था प्रतिनिधि।]
कार्यवाही : सञ्चालन महामंत्री द्वारा, सहायक : संगठन सचिव, कोषाध्यक्ष  
कार्यावलि: १. देवाधिदेव श्री चित्रगुप्त अर्चना।
२. गत सञ्चालन समिति/संगठन समिति/सामान्य समिति बैठकों के प्रतिवेदनों तथा पदाधिकारियों के लिखित प्रतिवेदनों पर विचार। 
३. आय-व्यय विवरण पारित किया जाना। 
४. बजट प्रस्तावों पर विचार  / अनुशंसा।
५. सञ्चालन समिति बैठक हेतु प्राप्त लिखित प्रतिवेदनों प्रस्तावों/सुझावों/कार्यक्रमों/आमंत्रणों/आवेदनों/सम्मान प्रस्तावों पर विचार व अनुशंसा। आगामी त्रिमास हेतु लक्ष्य निर्धारण।   
६. अन्य विषय अध्यक्ष की अनुमति से। 
७. महामंत्री/अध्यक्ष द्वारा सम्बोधन व समापन।
संध्या ६ बजे: स्वल्पाहार-चाय।
(आ)  सञ्चालन समिति बैठक  : अपरान्ह ६.३० बजे से रात्रि ८.०० बजे । 
[संविधान कंडिका ९-११ के अनुसार उपस्थिति प्रार्थनीय : अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री, सचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष, संगठन सचिव, संयुक्त संगठन सचिव, समन्वयक, कार्यकारी सदस्य] 
 कार्यवाही सञ्चालन महामंत्री द्वारा, सहायक: मुख्यालय सचिव, कार्यालय सचिव, कोषाध्यक्ष      
: कार्यावलि :
१. देवाधिदेव श्री चित्रगुप्त वंदना ।
२. गत सञ्चालन समिति बैठक के कार्यवाही प्रतिवेदन, सञ्चालन समिति सदस्यों / पदाधिकारियों (संगठन सचिव, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष,  कार्यालय सचिव, मुख्यालय सचिव आदि) के प्रतिवेदनों, कार्यकारिणी समिति की लिखित अनुशंसाओं, प्राप्त लिखित अवदानों पर विचार व निर्णय ।
३. सामान्य सम्मेलन में पारित कराने हेतु वार्षिक बजट को अन्तिम रूप देना। 
४. पंजीयक को प्रेषित करने हेतु संचालन समिति का अनुमोदन।
५. आगामी सम्मेलनों, बैठकों व प्रतिभा-सम्मान हेतु प्राप्त लिखित प्रस्तावों पर निर्णय। 
६.  सामान्य सभा हेतु प्रतिवेदनों, प्रस्तावों, कार्यक्रमों, प्रमाणपत्रों आदि का अनुमोदन।
७. महामंत्री / अध्यक्ष द्वारा सम्बोधन व समापन।
रात्रि ८ बजे: साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम।       रात्रि ९.३० बजे: अतिथि भोज।
दिनांक : ६ - ७- २०१४
(अ)  प्रातः ८ बजे: स्वल्पाहार, चाय ।
(आ) सामान्य सम्मेलन: प्रातः ९ बजे से ४ बजे 
संविधान कंडिका १२ के अनुसार उपस्थिति प्रार्थनीय : संस्था के समस्त पदाधिकारी व सदस्य, सम्बद्ध संस्थापदाधिकारी/सदस्य, समाज के सभी सदस्य व अन्य समाजों के कायस्थ मित्र.
(क) स्वागत / परिचय सत्र: सञ्चालन सचिव स्वागत समिति द्वारा 
१. ध्वजारोहण तथा देवाधिदेव श्री चित्रगुप्त पूजन, आरती ।
२. संयोजक द्वारा अतिथि/ पदाधिकारी स्वागत व स्वागत भाषण, आयोजन पर प्रकाश। 
३. अतिथि / राष्ट्रीय पदाधिकारी परिचय । 
४. सम्बद्ध तथा स्थानीय संस्था प्रतिनिधि परिचय। 
५. उपस्थितों द्वारा आत्म परिचय । 
६.  महामंत्री / अध्यक्ष द्वारा सम्बोधन।  
७. अतिथियों का सम्बोधन तथा संयोजक द्वारा आभार।
(ख) कार्यवाही सत्र: सञ्चालन महामंत्री द्वारा
१. महामंत्री द्वारा सत्र प्रक्रिया की जानकारी।
२. महापरिषद का लेखा-जोखा, वार्षिक बजट, नियुक्तियाँ, बैठक प्रतिवेदनों को पारित करना।
३. उपस्थित सदस्यों से प्राप्त लिखित प्रतिवेदनों / सुझावों आदि पर विचार व निर्णय।
३.  स्थानीय संस्थाओं, आयोजनों, समस्याओं पर चर्चा व निर्णय। 
४.  परिचर्चा: '२१ वीं सदी में जातिगत आरक्षण और कायस्थ समाज। 
५.  महामंत्री / अध्यक्ष द्वारा सम्बोधन ।
अपरान्ह १.०० बजे: बिरादरी भोज।
(ग) समापन सत्र: अपरान्ह २.०० बजे: सञ्चालन संयोजक द्वारा
१. अतिथि आमंत्रण।                        २. प्रतिभा पुरस्कार / सम्मान।
३. अतिथियों का सम्बोधन।                ४. अतिथियों द्वारा आयोजकों के प्रति आभार। 
५. संयोजक द्वारा अतिथियों के प्रति आभार व समापन।
​salil.sanjiv@gmail.com                                                                                  ​
​http://divyanarmada.blogspot.in                                               संजीव वर्मा 'सलिल'
​facebook: sahiyta salila / sanjiv verma 'salil'                                       महामंत्री 

शुक्रवार, 6 जून 2014

chhand salila: geeta chhand -sanjiv

छंद सलिला:

गीता Roseछंद 

संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति महाभागवत, प्रति पद - मात्रा २६ मात्रा, यति १४ - १२, पदांत गुरु लघु.

लक्षण छंद:

    चौदह भुवन विख्यात है , कुरु क्षेत्र गीता-ज्ञान
    आदित्य बारह मास नित , निष्काम करे विहान  
    अर्जुन सदृश जो करेगा , हरी पर अटल विश्वास  
    गुरु-लघु न व्यापे अंत हो , हरि-हस्त का आभास    
     संकेत: आदित्य = बारह 
उदाहरण:

१. जीवन भवन की नीव है , विश्वास- श्रम दीवार
   दृढ़ छत लगन की डालिये , रख हौसलों का द्वार   
   ख्वाबों की रखें खिड़कियाँ , नव कोशिशों का फर्श   
   सहयोग की हो छपाई , चिर उमंगों का अर्श 

२. अपने वतन में हो रहा , परदेश का आभास         
    अपनी विरासत खो रहे , किंचित नहीं अहसास
    होटल अधिक क्यों भा रहा? , घर से हुई क्यों ऊब?
    सोचिए! बदलाव करिए , सुहाये घर फिर खूब 

३. है क्या नियति के गर्भ में , यह कौन सकता बोल?
    काल पृष्ठों पर लिखा क्या , कब कौन सकता तौल?
    भाग्य में किसके बदा क्या , पढ़ कौन पाया खोल?
    कर नियति की अवमानना , चुप झेल अब भूडोल।

४. है क्षितिज के उस ओर भी , सम्भावना-विस्तार
    है ह्रदय के इस ओर भी , मृदु प्यार लिये बहार
    है मलयजी मलय में भी , बारूद की दुर्गंध
    है प्रलय की पदचाप सी , उठ रोक- बाँट सुगंध   
                         *********  
(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गीता, गीतिका, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मदनाग, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, रसाल, राजीव, राधिका, रामा, रूपमाला, रोला, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, शोभन, शंकर, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सिंहिका, सुखदा, सुगति, सुजान, सुमित्र, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)

शुक्रवार, 30 मई 2014

lekh: kundli milan men gan vichar sanjiv

लेख: 
कुंडली मिलान में गण-विचार
संजीव 
*








वैवाहिक संबंध की चर्चा होने पर लड़का-लड़की की कुंडली मिलान की परंपरा भारत में है. कुंडली में वर्ण का १, वश्य के २, तारा के ३, योनि के ४, गृह मैटरर के ५, गण के ६, भकूट के ७ तथा नाड़ी के ८ कुल ३६ गुण होते हैं.जितने अधिक गुण मिलें विवाह उतना अधिक सुखद माना जाता है. इसके अतिरिक्त मंगल दोष का भी  विचार किया जाता है. 

कुंडली मिलान में 'गण' के ६ अंक होते हैं. गण से आशय मन:स्थिति या मिजाज (टेम्परामेन्ट) के तालमेल से हैं. गण अनुकूल हो तो दोनों में उत्तम सामंजस्य और समन्वय उत्तम होने तथा गण न मिले तो शेष सब अनुकूल होने पर भी अकारण वैचारिक टकराव और मानसिक क्लेश होने की आशंका की जाती है. दैनंदिन जीवन में छोटी-छोटी बातों में हर समय एक-दूसरे की सहमति लेना या एक-दूसरे से सहमत होना संभव नहीं होता,  दूसरे को सहजता से न ले सके और टकराव हो तो पूरे परिवार की मानसिक शांति नष्ट होती है। गण भावी पति-पत्नी के वैचारिक साम्य और सहिष्णुता को इंगित करते हैं। 

ज्योतिष के प्रमुख ग्रन्थ कल्पद्रुम के अनुसार निम्न २ स्थितियों में गण दोष को महत्त्वहीन कहा गया है:

१. 'रक्षो गणः पुमान स्याचेत्कान्या भवन्ति मानवी । केपिछान्ति तदोद्वाहम व्यस्तम कोपोह नेछति ।।' 

अर्थात जब जातक का कृतिका, रोहिणी, स्वाति, मघा, उत्तराफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढा नक्षत्रों में जन्म हुआ हो।

        २. 'कृतिका रोहिणी स्वामी मघा चोत्त्राफल्गुनी । पूर्वाषाढेत्तराषाढे न क्वचिद गुण दोषः ।।'

अर्थात जब वर-कन्या के राशि स्वामियों अथवा नवांश के स्वामियों में मैत्री हो।

      गण को ३ वर्गों 1-देवगण, 2-नर गण, 3-राक्षस गण में बाँटा गया है। गण मिलान ३ स्थितियाँ हो सकती हैं:

1. वर-कन्या दोनों समान गण के हों तो सामंजस्य व समन्वय उत्तम होता है. 

2. वर-कन्या देव-नर हों तो सामंजस्य संतोषप्रद होता है ।

३. वर-कन्या देव-राक्षस हो तो सामंजस्य न्यून होने के कारण पारस्परिक टकराव होता है ।

शारंगीय के अनुसार; वर राक्षस गण का और कन्या मनुष्य गण की हो तो विवाह उचित होगा। इसके विपरीत वर मनुष्य गण का एवं कन्या राक्षस गण की हो तो विवाह उचित नहीं अर्थात सामंजस्य नहीं होगा। 

सर्व विदित है कि देव सद्गुणी किन्तु विलासी, नर या मानव परिश्रमी तथा संयमी एवं असुर या राक्षस दुर्गुणी, क्रोधी तथा अपनी इच्छा अन्यों पर थोपनेवाले होते हैं।  

भारत में सामान्यतः पुरुषप्रधान परिवार हैं अर्थात पत्नी सामान्यतः पति की अनुगामिनी होती है। युवा अपनी पसंद से विवाह करें या अभिभावक तय करें दोनों स्थितियों में वर-वधु के जीवन के सभी पहलू एक दूसरे को विदित नहीं हो पाते। गण मिलान अज्ञात पहलुओं का संकेत कर सकता है। गण को कब-कितना महत्त्व देना है यह उक्त दोनों तथ्यों तथा वर-वधु के स्वभाव, गुणों, शैक्षिक-सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के परिप्रेक्ष्य में विचारकर तय करना चाहिए। 

गुरुवार, 29 मई 2014

haiku: sanjiv

हाइकु सलिला: 

संजीव 
*
कमल खिला
संसद मंदिर में
पंजे को गिला   
*
हट गयी है 
संसद से कैक्टस
तुलसी लगी
* 
नरेंद्र नाम 
गूँजा था, गूँज रहा 
अमरीका में 
*
मिटा कहानी 
माँ और बेटे लिखें 
नयी कहानी 
 * 
नहीं हैं साथ 
वर्षों से पति-पत्नी 
फिर भी साथ 
*

रविवार, 18 मई 2014

nari vimarsh

​

सोचिए, क्या औरतें गैर इस्लामिक और मर्दों की गुलाम मात्र हैं?

इस्लामाबाद। द कौंसिल ऑफ़ इस्लामिक आइडिओलॉजी The Council of Islamic Ideology (CII) की १९२ वीं बैठक के निर्णय अनुसार ' औरतों का अस्तित्व शरीया तथा अल्लाह की इच्छा के विपरीत है. कौंसिल के चेयरमैन मौलाना मुहम्मद खान शीरानी ने कहा कि औरतों का होना प्रकृति के नियमों का उल्लंघन है तथा औरतों से इस्लाम और शरीया की रक्षा लिए औरतों को निजी अस्तित्व न रखने के लिए बाध्य किया जाए. मुस्लिम औरतों की शादी के लिए न्यूनतम आयु निर्धारण को इस्लामविरोधी घोषित के २ दिन बाद यह घोषणा की गयी. शीरानी ने औरतों को इस्लाम विरोधी घाषित करते हुए  कहा कि औरतें दो प्रकार की हराम  (निषिद्ध) तथा मकरूह (नापसंद) होती हैं. कोई भी औरत जो अपनी इच्छा अनुसार कार्य करती है हराम तथा इस्लाम के विरुद्ध षड्यंत्रकर्त्री है.  केवल पूरी तरह आज्ञापालक औरत खुद को मकरूह के स्तर तक उठा सकती है, यही इस्लाम की उदारता तथा मुस्लिम पुरुष की कोशिश है. कौंसिल सदस्यों ने औरतों से जुड़े कर ऐतिहासिक सन्दर्भों विचार के बाद पाया की हर औरत फ़ित्ना का  इस्लाम की दुश्मन है. उन्होंने यह निर्णय भी लिया कि मोमिन तथा मुजाहिदीन औरतों को दास होने तक रोककर  की इस्लाम शांति, समृद्धि तथा लैंगिक समानता का धर्म बना रहे. एक प्रतिनिधि ने कहा की औरतों  सम्बन्धी अंतर्राष्ट्रीय मानक इस्लाम या पाकिस्तान के संविधान जिसमें अल्लाह को सर्वोच्चता दे गयी है के विरोधी हों तो उन्हें नहीं माना जाना चाहिए। कौंसिल ने सरकार को सलाह दी की औरतों से श्वास लेने का अधिकार छीनकर उसके पति या पालक को दिया जाना चाहिए। औरत को किसी भी हालत में श्वास लेने या न लेने का निर्णय करने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।

Islamabad - Sharia Correspondent: The Council of Islamic Ideology (CII) concluded their 192nd meeting on Thursday with the ruling that women are un-Islamic and that their mere existence contradicted Sharia and the will of Allah. As the meeting concluded CII Chairman Maulana Muhammad Khan Shirani noted that women by existing defied the laws of nature, and to protect Islam and the Sharia women should be forced to stop existing as soon as possible. The announcement comes a couple of days after CII’s 191st meeting where they dubbed laws related to minimum marriage age to be un-Islamic.

After declaring women to be un-Islamic, Shirani explained that there were actually two kinds of women – haraam and makrooh. “We can divide all women in the world into two distinct categories: those who are haraam and those who are makrooh. Now the difference between haraam and makrooh is that the former is categorically forbidden while the latter is really really disliked,” Shirani said.

He further went on to explain how the women around the world can ensure that they get promoted to being makrooh, from just being downright haraam. “Any woman that exercises her will is haraam, absolutely haraam, and is conspiring against Islam and the Ummah, whereas those women who are totally subservient can reach the status of being makrooh. Such is the generosity of our ideology and such is the endeavour of Muslim men like us who are the true torchbearers of gender equality,” the CII chairman added.

Officials told Khabaristan Today that the council members deliberated over various historic references related to women and concluded that each woman is a source of fitna and a perpetual enemy of Islam. They also decided that by restricting them to their subordinate, bordering on slave status, the momineen and the mujahideen can ensure that Islam continues to be the religion of peace, prosperity and gender equality.

Responding to a question one of the officials said that international standards of gender equality should not be used if they contradict Islam or the constitution of Pakistan that had incorporated Islam and had given sovereignty to Allah. “We don’t believe in western ideals, and nothing that contradicts Islam should ever be paid heed. In any case by giving women the higher status of being makrooh, it’s us Muslims who have paved the way for true, Sharia compliant feminism,” the official said.

The CII meeting also advised the government that to protect Islam women’s right to breathe should also be taken away from them. “Whether a woman is allowed to breathe or not be left up to her husband or male guardian, and no woman under any circumstance whatsoever should be allowed to decide whether she can breathe or not,” Shirani said.

गुरुवार, 15 मई 2014

chhand salila: kavya chhand -sanjiv

सन्देश; हिंदी पर गर्व करें

सन्देश; हिंदी पर गर्व करें, न बोल सकें तो शर्म

ॐ
छंद सलिला:   ​​​

काव्य छंद ​

संजीव
*
छंद-लक्षण: जाति अवतारी, प्रति चरण मात्रा २४ मात्रा, यति ग्यारह-तेरह, मात्रा बाँट ६+४+४+४+६, हर चरण में ग्यारहवीं मात्रा लघु

लक्षण छंद:
   काव्य छंद / चौबी/स, कला / ग्यारह/-तेरह हो
   रखें कला / लघु रू/द्र, षट क/ली आ/दि-अंत हो 
   मध्य चतुष्/कल ती/न, द्विमा/ता क/र्मदेव वत 
   अवतारी / की सुं/द,र छवि / लख शं/का कर मत  
(संकेत: रूद्र = ग्यारह, द्विमाता कर्मदेव = नंदिनी-इरावती तथा चित्रगुप्त)  

उदाहरण:  १. चमक-दमक/कर दिल / दहला/ती बिज/ली गिरकर
   दादुर ना/चे उछ/ल-कूद/कर, मट/क-मटककर
   सनन-सनन / सन पव/न खेल/ता मच/ल-मचलकर
   ढाँक सूर्य / को मे/घ अकड़/ता गर/ज-गरजकर      

२. अमन-चैन / की है / तलाश / दुनिया / में सबको
    फिर भी झग/ड़े-झं/झट घे/रे हैं / जन-जन को
    लोभ--मोह / माया-/ममता / बेढब / चक्कर है

    हर युग में /परमा/र्थ-स्वार्थ / की ही /टक्कर है 

   ३. मस्जिद-मं/दिर ध/र्म-कर्म / का म/र्म न समझे 
    रीति-रिवा/ज़ों में / रहते / हैं हर/दम उलझे
    सेवा भू/ले पथ / इनको / मेवा / का रुचता
    लालच ने / मोहा,/ तिल भर / भी त्या/ग न दिखता                    
                              *********

(अब तक प्रस्तुत छंद: अखण्ड, अग्र, अचल, अचल धृति, अरुण, अवतार, अहीर, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रवज्रा, उड़ियाना, उपमान, उपेन्द्रवज्रा, उल्लाला, एकावली, कुकुभ, कज्जल, कामिनीमोहन, काव्य, कीर्ति, कुण्डल, कुडंली, गंग, घनाक्षरी, चौबोला, चंडिका, चंद्रायण, छवि, जग, जाया, तांडव, तोमर, त्रिलोकी, दिक्पाल, दीप, दीपकी, दोधक, दृढ़पद, नित, निधि, निश्चल, प्लवंगम्, प्रतिभा, प्रदोष, प्रभाती, प्रेमा, बाला, भव, भानु, मंजुतिलका, मदनअवतार, मधुभार, मधुमालती, मनहरण घनाक्षरी, मनमोहन, मनोरम, मानव, माली, माया, माला, मोहन, मृदुगति, योग, ऋद्धि, रसामृत, राजीव, राधिका, रामा, लीला, वस्तुवदनक, वाणी, विरहणी, विशेषिका, शक्तिपूजा, शशिवदना, शाला, शास्त्र, शिव, शुभगति, सरस, सार, सारस, सिद्धि, सुखदा, सुगति, सुजान, संपदा, हरि, हेमंत, हंसगति, हंसी)