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गुरुवार, 1 जनवरी 2015

mahapurush


कायस्थ महापुरुष / व्यक्तित्व, धर्म, साहित्यकार, राजनीति, समाजसेवा, योद्धा, ऐतिहासिक



 

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vandana chitragiptaji:



चित्रगुप्त वंदना:   

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
*
हे चित्रगुप्त भगवन आपकी जय-जय
हे परमेश्वर मतिमान आपकी जय-जय

हे अक्षर अजर अमर अविनाशी अक्षय
हे अजित अमित गुणवान आपकी जय-जय  

हे तमहर शुभकर विधि-हरि-हर के स्वामी
हे आत्मा-प्राण निधान आपकी जय-जय

हे चारु ललित शालीन सौम्य शुचि सुंदर
हे अविकारी संप्राण आपकी जय-जय

हे चिंतन मनन सृजन रचना वरदानी
हे सृजनधर्मिता-खान आपकी जय-जय

बेटे को कहती बाप बाप का दुनिया
विधि-पिता ब्रम्ह संतान आपकी जय-जय

विधि-हरि-हर को प्रगटाकर, विधि से प्रगटे
दिन संध्या निशा विहान आपकी जय-जय

सत-शिव-सुंदर सत-चित-आनंद हो देवा
श्री क्ली ह्री कीर्तिवितान आपकी जय-जय

तुम कारण-कार्य तुम्हीं परिणाम अनामी
हे शून्य सनातन गान आपकी जय-जय

सब कुछ तुमसे सब कुछ तुममें अविनाशी
हे कण-कण के भगवान आपकी जय-जय

हे काया-माया-छाया-पति परमेश्वर
हे सृष्टि-सृजन अभियान आपकी जय-जय

***********

मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

smriti geet:

शोक के पल:

छिन्दवाड़ा. शनिचरा बाजार निवासी, नगर के प्रतिष्ठित राजा परिवार के प्रमुख श्री वीरेंद्र मोहन राजा का अल्प बीमारी के बाद निधन हो गया. वे अपनी सरलता, मिलनसारिता और मददगारी प्रवृत्ति के लिए ख्यात थे. स्व. श्री लक्ष्मीनारायण राजा और स्व. प्रभावती राजा के ज्येष्ठ पुत्र वीरेंद्र के पुत्र निमिष मुल्ताई (बैतूल) में व्यवहार न्यायाधीश पदस्थ हैं. त्रयोदशी संस्कार ८ जनवरी को छिंदवाड़ा स्थित निवास पर होगा। 


माँ स्व. प्रभावती जी, पत्नि साधना तथा पुत्र निमिष सहित वीरेन्द्र जी

स्मृति गीत: 

नहीं भरोसा होता साथ न आते तुम 
काश हमारे साथ सदा रह पाते तुम
पल-पल हमको याद बहुत तुम आते हो -
आँख खुले या मुंदे दिखे मुस्काते तुम.
*
सहज-सरल व्यक्तित्व प्रवाहित नदिया सा 
बहा ह्रदय में सदा स्नेह का दरिया सा 
श्वास-श्वास साधना करी संबंधों की- 
प्रभा-लक्ष्मीनारायण का सपना सा 
करुणा अरुणा नीना की राखी-सावन 
महेश सुधीर प्रणय का नाता अपना सा  
खटकी कुण्डी, लगे लौट घर आते तुम 

*
'धीरू' गया कलपकर टूटे रोये थे 
सम्हाल सहारा सबका बने, न खोये थे 
स्वाति वतन विनती के आँसू पोंछ दिये 
सबके नयनों में नव सपने बोये थे 
सचि रूचि रानू सोनू के प्रिय मामाजी 
जगे नहीं क्यों? अभी-अभी तो सोये थे 
छोटे-बड़ों सभी को थे मन भाते तुम 
*
कर नेहा अभिषेक न अब हँस पायेगी 
आँगन में गौरैया कैसे गायेगी?
निमिष-मनीषा शीश झुकाये मौन खड़े 
थाप न ढोलक की अब मन को भायेगी 
मनवन्तर ही लगता ठिठक हो चुप 
तुहिना कलिका संग कैसे मुस्कायेगी 
सलिल-साधना को फिर गले लगते तुम 
***






  

smriti geet:

शोक के पल:

छिन्दवाड़ा. शनिचरा बाजार निवासी, नगर के प्रतिष्ठित राजा परिवार के प्रमुख श्री वीरेंद्र मोहन राजा का अल्प बीमारी के बाद निधन हो गया. वे अपनी सरलता, मिलनसारिता और मददगारी प्रवृत्ति के लिए ख्यात थे. स्व. श्री लक्ष्मीनारायण राजा और स्व. प्रभावती राजा के ज्येष्ठ पुत्र वीरेंद्र के पुत्र निमिष मुल्ताई (बैतूल) में व्यवहार न्यायाधीश पदस्थ हैं. त्रयोदशी संस्कार ८ जनवरी को छिंदवाड़ा स्थित निवास पर होगा। 


माँ स्व. प्रभावती जी, पत्नि साधना तथा पुत्र निमिष सहित वीरेन्द्र जी

स्मृति गीत: 

नहीं भरोसा होता साथ न आते तुम 
काश हमारे साथ सदा रह पाते तुम
पल-पल हमको याद बहुत तुम आते हो -
आँख खुले या मुंदे दिखे मुस्काते तुम.
*
सहज-सरल व्यक्तित्व प्रवाहित नदिया सा 
बहा ह्रदय में सदा स्नेह का दरिया सा 
श्वास-श्वास साधना करी संबंधों की- 
प्रभा-लक्ष्मीनारायण का सपना सा 
करुणा अरुणा नीना की राखी-सावन 
महेश सुधीर प्रणय का नाता अपना सा  
खटकी कुण्डी, लगे लौट घर आते तुम 

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'धीरू' गया कलपकर टूटे रोये थे 
सम्हाल सहारा सबका बने, न खोये थे 
स्वाति वतन विनती के आँसू पोंछ दिये 
सबके नयनों में नव सपने बोये थे 
सचि रूचि रानू सोनू के प्रिय मामाजी 
जगे नहीं क्यों? अभी-अभी तो सोये थे 
छोटे-बड़ों सभी को थे मन भाते तुम 
*
कर नेहा अभिषेक न अब हँस पायेगी 
आँगन में गौरैया कैसे गायेगी?
निमिष-मनीषा शीश झुकाये मौन खड़े 
थाप न ढोलक की अब मन को भायेगी 
मनवन्तर ही लगता ठिठक हो चुप 
तुहिना कलिका संग कैसे मुस्कायेगी 
सलिल-साधना को फिर गले लगते तुम 
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chitragupt stuti:





चित्रगुप्त नमस्तुभ्यं लेखकाक्षरदायक
कायस्थ जातिमासाद्य चित्रगुप्त नमोस्तुते.

हे चित्रगुप्तजी! नमन आपको शत-शत
कायस्थ-मूल लेखक को अक्षरदाता। मंत्र, श्लोक,

हे चित्रगुप्तजी! आपको नमस्कार. आप लेखकों को अक्षर देनेवाले हैं. आप कायस्थ जाति के आदि (उद्गम) हैं. हम आपको नमन कर आपकी स्तुति करते हैं.

chitragupta vandana:



चित्रगुप्त वंदना: 

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
*
हे चित्रगुप्त भगवन आपकी जय-जय
हे परमेश्वर मतिमान आपकी जय-जय

हे अक्षर अजर अमर अविनाशी अक्षय
हे अजित अमित गुणवान आपकी जय-जय

हे तमहर शुभकर विधि-हरि-हर के स्वामी
हे आत्मा-प्राण निधान आपकी जय-जय

हे चारु ललित शालीन सौम्य शुचि सुंदर
हे अविकारी संप्राण आपकी जय-जय

हे चिंतन मनन सृजन रचना वरदानी
हे सृजनधर्मिता-खान आपकी जय-जय

बेटे को कहती बाप बाप का दुनिया
विधि-पिता ब्रम्ह संतान आपकी जय-जय

विधि-हरि-हर को प्रगटाकर, विधि से प्रगटे
दिन संध्या निशा विहान आपकी जय-जय

सत-शिव-सुंदर सत-चित-आनंद हो देवा
श्री क्ली ह्री कीर्तिवितान आपकी जय-जय

तुम कारण-कार्य तुम्हीं परिणाम अनामी
हे शून्य सनातन गान आपकी जय-जय

सब कुछ तुमसे सब कुछ तुममें अविनाशी
हे कण-कण के भगवान आपकी जय-जय

हे काया-माया-छाया-पति परमेश्वर
हे सृष्टि-सृजन अभियान आपकी जय-जय

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शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014