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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

चित्रगुप्त ओंकार:

दोहा सलिला:
श्री चित्रगुप्त भजन
.

ॐ परात्पर ब्रम्ह प्रभु, चित्रगुप्त ओंकार।
गूंजी अनहद नाद वे, निराकार-भवसार।

प्रभु अविनाशी अनश्वर, निज इच्छा-अनुसार।
रचें शून्य से सृष्टि हो, निराकार साकार।



एक वही कोई नहीं, दूजा या समकक्ष।
होकर भी वे हैं नहीं, परिधि केंद्र वृत्त अक्ष।


प्रभु ही भाव-अभाव हैं, प्रभु स्वभाव-निर्भाव।
हैं अनादि, वे सादि भी,सांत-अनंत निभाव।


प्रणव मन्त्र ओंकार ही, सकल सृष्टि का मूल।
भूत-आज- भावी त्रयी, महाकाल के शूल।


ॐ निनादित नाद नित, वर्तुल वाले अनंत।
अन्तरिक्ष में व्याप्त विधि,गुंजित दिशा दिगंत।


ॐ निरंजन नाद से, उपजा दिव्य प्रकाश।
नव आभा से चमत्कृत,ध्वनि-प्रकाश के पाश।


परिभ्रमित ऊर्जा प्रबल, परिक्रमित हो नित्य।
सघन-संगठित हो बनी, कण अनगिनत अनित्य।


कण-कण में परिव्याप्त थी, ऊर्जा शक्ति अपार।
मिलन-विलय घर्षण जनित, कण ज्योतित अंगार।


आकर्षण हरि में बहुत, विधि भी सके न मेट।
प्रबल विकर्षण हर कहीं सकता कौन समेट?


विधि-हरि एक-अनेक हों, हर अनेक से एक।
हैं असंख्य ब्रम्हांड में ,लख दिग्भ्रमित विवेक.

कण में कण के मिलन से, बने पिंड-आकाश।
कण ही कण से अलग हो, रचे नाश के पाश।


कण से कण टकरा करे, नव ऊर्जा संचार।
कण-कण में परब्रम्ह का, पल-पल कर दीदार।


कण-कण के कारण बने, चिन्मय घाट-आकाश।
कण-कण ही तारण-तरण, मृण्मय भव-भवपाश।

अजर अमर अक्षर प्रखर, बिखर-निखर कण व्याप्त।
पिंड परवलय को चुनें, केंद्र भास्कर आप्त।

शक्ति परा-अपरा अजित, अमित करे विस्तार।
गृह-उपगृह परिपथ सहित, रचें सौर-संसार।

सिन्धु समाहित बिंदु में, बिंदु-सिंधु में लीन।
गिरी-गव्हर सागर अगम, प्रगटे हुए विलीन।

ऊर्जा और समीर के, कण मिल उगलें आग।
ज्वालाओं की लपट या, अगणित ऊर्जा नग?

तापमान चढ़-उतर कर, खेल रहा क्या खेल?
क्रिया-प्रतिक्रिया नित नयी, विस्मित था नभ झेल।

सृजन-नाश के ताप से, कैसे होगा त्राण?
आकुल-व्याकुल थे सकल, सम्प्राणित पाषाण।

अनहद ध्वनि के नाद से, प्रगट नर्मदा दिव्य।
अमरकंटकी निःसृत हो, प्रवहीं भू पर नव्य।

बुधवार, 18 फ़रवरी 2009

shri chitragupata ji arati



श्री चित्रगुप्त आरती

श्री चित्रगुप्त मंदिर खजुराहो मध्य प्रदेश






















शनिवार, 7 फ़रवरी 2009

rakam padadhikari:

रा का म :पदाधिकारी - सर्व चित्रांश

मुख्य समन्वयक : त्रिलोकी प्रसाद वर्मा, राम सखी निवास, पड़ाव पोखर लेन मुजफ्फरपुर
दूरभाष: ०६२१-२२४३९९९, चलभाष: ०९४३१२३८६२३

राष्ट्रीय अध्यक्ष : अरविन्द कुमार सम्भव, २/१३९ कृष्णशीला, एस. ऍफ़. अग्रवाल फार्म जयपुर ३०२०२०
दूरभाष: ०१४१-२३९६०४६, चलभाष: ०९४१४७९६०३८

वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष : आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', 2०४ विजय अपार्टमेन्ट, नेपिअर टाउन, जबलपुर
४८२००१ दूरभाष: ०७६१-२४१११३१, चलभाष: ०९४२५१ ८३२४४,
ई मेल: सलिल
.संजीव@जीमेल.com" target=_blank>सलिल.संजीव@जीमेल.कॉम , ब्लॉग: संजिव्सलिल.ब्लागस्पाट.कॉम , संजिव्सलिल.ब्लॉग.सीओ.इन

राष्ट्रीय महामंत्री : कुमार अनुपम, संपादक चित्रगुप्त परिवार संदेश, चित्रगुप्त समाज बिहार, खगौल मार्ग, अनीसाबाद पटना ८००००२, दूरभाष: ०६१२- २३५१९६४, चलभाष: ०९४३१४२६९९१

राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री : दिनेश कुमार माथुर, जयपुर,
दूरभाष: ०१४१_२७८२३८२, चलभाष: ०९८२९७ ५२१९२

राष्ट्रीय संगठन मंत्री: अरविन्द कुमार सिन्हा, पटना
दूरभाष: ०६१२-२६८३३३३, चलभाष: ०९४३१०७७५५५

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष :
उत्तर प्रदेश -1 : राकेश निगम, झांसी
दूरभाष: ०५१७-२४४२३१३, चलभाष: ०९४१५१ ४३४७६
उत्तर प्रदेश - 2 : चारू चन्द्र खरे, नव नक्षत्र प्रेस, कटरा, बांदा २१०००१,
दूरभाष: ०५१९२-२२४३६८, चलभाष: ९४१५१४४०४७ / ९८३८२०४०४७

मध्य प्रदेश-१: पी ऐन श्रीवास्तव, DX १०, योजना क्र ७१, सेक्टर सी, गुमाश्ता नगर, इंदौर ४५२००९, दूरभाष: ०७३१-२४८३८५४, चलभाष: ०९४२५९०००२५

छत्तीसगढ़ -1 : राजेश सक्सेना, कल्याण कोचिंग कक्षाएं, स्टेशन मार्ग, रायपुर
दूरभाष: ०७७१-२५२५५८१, चलभाष: ९८२६१ ८३२४७

छत्तीसगढ़ -2 :अरुण श्रीवास्तव 'विनीत', संपादक चित्रांश चर्चा, शान्ति कुञ्ज, २१/५८१ सिंधिया नगर, दुर्ग ४९१००२, दूरभाष: ०७८८-२२९०३३१, चलभाष: ९४२५२ ०१२५१, ई मेल: चित्रांशचर्चा चित्रन्श्चर्चा@वेबदुनिया.com" target=_blank>@वेबदुनिया.कॉम

बिहार: हरिहर प्रसाद सिन्हा,
दूरभाष: ०६१२- २६४३१५५, चलभाष:: ०९३३४२७४६९७

rajasthan : प्रो वाय ऐन माथुर, कोटा
दूरभाष: ०७४४-२५०१४७५, चलभाष: ९४६१६ ६०३३८

धर्म-आध्यात्म प्रकोष्ठ : सुरेन्द्र नाथ चित्रांशी, रतन नगर, कानपूर
दूरभाष: , चलभाष: ०९४५२५२६१८१
पत्रिका प्रकोष्ठ: कमल कान्त वर्मा , संपादक चित्रांश संदेश, रति विला, ऐफ ३१०६ राजाजीपुरम , लखनऊ २२६०१७, दूरभाष: ०५२२-२४१८१४७, चलभाष: ०९४५२६७४०१२

सामाजिक प्रकोष्ठ : रामानंद श्रीवास्तव, पटना
दूरभाष: , चलभाष: ०९३३४१ ०००८९

शिक्षा-संस्कृति प्रकोष्ठ : रनजीत सिन्हा, कटिहार दूरभाष: , चलभाष: ०९४३००

राष्ट्रीय कोशाध्यक्ष : भगवत स्वरुप कुलश्रेष्ठ , जयपुर
दूरभाष: ०१४१-२५९३१०७, चलभाष: ०९४१४७ १७९०३

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2009

shri chitrgupt parivar




chitrgupt ji rigved men


चित्र इद राजा राजका इदन्यके यके सरस्वतीमनु ।
पर्जन्य इव ततनद धि वर्ष्ट्या सहस्रमयुता ददत ॥ RIG VEDA 8/21/18

doha dev vandana

दोहा:
संजीव
*
निराकार पर ब्रम्ह हे!, चित्रगुप्त भगवान
हर काया में समाया, प्रभु का अंश समान
.
चित्रगुप्त परब्रम्ह हे!, रहिए सदय सदैव
ध्यान तुम्हारा कर सकूँ, तहकर सभी कुटैव
.
माता नन्दिनी-दक्षिणा, हमको दें आशीष
निभा सकें कर्तव्य निज, हम हो सकें मनीष
.
काया हैं प्रभु आप ही, माया हैं प्रभु आप
मन मंदिर होगा करें, नित्य तुम्हारा जाप
.
कंकर कंकर में  छिपा, गुप्त चित्र लें देख
ऐसी कब होगी 'सलिल', कर्मों की शुभ रेख
*     

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2009

श्री भगवान - आचार्य संजीव 'सलिल'

भक्ति गीत
श्री भगवान
आचार्य संजीव 'सलिल'

मिटाने भक्तों का दुःख-दर्द, जगत में आते श्री भगवान्...

जब मेरे प्रभु जग में आवें, नभ से देव सुमन बरसावें।
कलम-दवात सुशोभित कर में, देते अक्षर ज्ञान
मिटाने भक्तों का दुःख-दर्द, जगत में आते श्री भगवान्...

चित्रगुप्त प्रभु शब्द-शक्ति हैं, माँ सरस्वती नाद शक्ति हैं।
ध्वनि अक्षर का मेल ऋचाएं, मन्त्र-श्लोक विज्ञान
मिटाने भक्तों का दुःख-दर्द, जगत में आते श्री भगवान्...

मातु नंदिनी आदिशक्ति हैं। माँ इरावती मोह-मुक्ति हैं.
इडा-पिंगला रिद्धि-सिद्धिवत, करती जग-उत्थान
मिटाने भक्तों का दुःख-दर्द, जगत में आते श्री भगवान्...

कण-कण में जो चित्र गुप्त है, कर्म-लेख वह चित्रगुप्त है।
कायस्थ है काया में स्थित, आत्मा महिमावान
मिटाने भक्तों का दुःख-दर्द, जगत में आते श्री भगवान्...

विधि-हरि-हर रच-पाल-मिटायें, अनहद सुन योगी तर जायें।
रमा-शारदा-शक्ति करें नित, जड़-चेतन कल्याण
मिटाने भक्तों का दुःख-दर्द, जगत में आते श्री भगवान्...

श्यामल मुखछवि, रूप सुहाना, जैसा बोना वैसा पाना।
कर्म न कोई छिपे ईश से, 'सलिल' रहे अनजान
मिटाने भक्तों का दुःख-दर्द, जगत में आते श्री भगवान्...

लोभ-मोह-विद्वेष-काम तज, करुणासागर प्रभु का नाम भज।
कर सत्कर्म 'शान्ति' पा ले, दुष्कर्म अशांति विधान
मिटाने भक्तों का दुःख-दर्द, जगत में आते श्री भगवान्...


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